बूटिंग प्रक्रिया
कंप्यूटर के स्टार्ट (start) होने की प्रक्रिया बूटिंग कहलाती
है. ऑपरेटिंग सिस्टम डॉस साधारणतः एक डिस्क पर स्टोर रहता है, जो की हार्ड डिस्क
या फ्लॉपी डिस्क हो सकती है. यदि आपके पास हार्ड डिस्क मशीन है तो उसमे एक ही बार
ऑपरेटिंग सिस्टम डलवा लिया जाता है, इससे आपको कंप्यूटर को बूट कराने के लिए
ऑपरेटिंग डिस्क नही लगानी पड़ेगी.
यदि हमारे पास हार्ड डिस्क नही है, तो कंप्यूटर को चलाने के लिए
हर बार हमें ऑपरेटिंग डिस्क लगानी पड़ेगी. यदि आपके पास दो ड्राइव (drive) है तो
आपको ऑपरेटिंग सिस्टम को “A” में लोड करना होगा. जो डिस्क
ड्राइव ऑपरेटिंग सिस्टम को लोड करने के लिए प्रयोग की जाती है, उसे डिफॉल्ट ड्राइव
(Default drive) कहते हैं.
यदि आपका कंप्यूटर किसी कारणवश रुक जाता है तो आप इसे
रीस्टार्ट (Restart) कर सकते हैं लेकिन थोड़ी सी समस्या आते ही कंप्यूटर को रीबूट
या रीस्टार्ट करना उचित नही है इससे उस समय आप जिस प्रोग्राम में काम कर रहे हैं.
उसका डाटा ख़राब (Damage) हो सकता है. इसलिए रीबूटिंग केवल तभी की जनि चाहिए, जब
आपके पास इसके अतिरिक्त कोई विकल्प (Alternate) न रहे.
REBOOTING –
यदि आप अपने कंप्यूटर को रीबूट करना चाहते हैं, तो आपके पास दो
विकल्प हैं –
(1) A Warm Boot (2) A Cold Boot
(1) WARM BOOT (वार्म बूट) -
वार्मबूटिंग के लिए आपको कुछ की (Keys) एक साथ दबानी (press)
होगी. कन्ट्रोल – की
(Control Key) आल्ट – की
(Alt key) तथा डैल – की
(DelKey) एक साथ दबानी होगी. जिससे आपकी स्क्रीन साफ हो जाएगी तथा कंप्यूटर
रीस्टार्ट हो जायेगा.
(2) COLD BOOT (कोल्ड बूट) -
यदि वार्म बूट से आपकी समस्या पूरी तरह हल नही होती है, तो
आपको कोल्ड बूट करना होगा, इसके लिए अपने कंप्यूटर के पॉवर स्विच (power switch)
को ऑफ़ (off ) कर दीजिये तथा थोड़ी देर रुकिये तथा फिर power switch को ऑन (On) कर
दीजिये